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डायरेक्ट ब्रोकर

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रतनइंडिया एंट आर्म(RattanIndia Ent Arm) को बीमा ब्रोकर(Insurance Broker) लाइसेंस प्राप्त हुआ

रतनइंडिया एंट आर्म(RattanIndia Ent Arm) को बीमा डायरेक्ट ब्रोकर ब्रोकर(Insurance Broker) लाइसेंस प्राप्त हुआ

रतनइंडिया एंटरप्राइजेज (आरईएल) ने घोषणा की कि उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी रतनइंडिया एंट आर्म(RattanIndia Ent Arm), नियोटेक इंश्योरेंस ब्रोकर्स (Insurance Broker) ने जीवन और सामान्य बीमा के लिए आईआरडीएआई से बीमा डायरेक्ट ब्रोकर लाइसेंस प्राप्त किया है।

यह लाइसेंस कंपनी को जीवन और सामान्य बीमा उत्पादों की बिक्री का कारोबार शुरू करने में मदद करेगा, हालांकि इसके फिनटेक मार्केटप्लेस प्लेटफॉर्म बैंकसे पर डिजिटल चैनल हैं।

कंपनी ने कहा कि आधार और अकाउंट एग्रीगेटर नेटवर्क के साथ डिजिटल इंडिया इकोसिस्टम डिजिटल मोड के माध्यम से सेल्फ-सर्विस प्लेटफॉर्म को सक्षम कर रहा है जो ग्राहकों के लिए लागत प्रभावी और पारदर्शी तरीके से परेशानी मुक्त उपभोक्ता अनुभव प्रदान करता है। यह अपने फिनटेक प्लेटफॉर्म बैंकसे पर जमीनी स्तर पर डेटा संचालित डिजिटल बीमा उत्पाद वितरित करेगा।

रतनइंडिया एंटरप्राइजेज अपने नए युग के विकास व्यवसायों के लिए रतनइंडिया समूह की प्रमुख कंपनी है। कंपनी ने नेक्स्ट-जेन मोबिलिटी सॉल्यूशंस का उपयोग करके स्वच्छ आवागमन का लोकतंत्रीकरण करने के लिए रिवोल्ट मोटर्स के माध्यम से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी स्पेस में डायरेक्ट ब्रोकर प्रवेश किया है। कंपनी पूरी तरह से विश्व स्तरीय इलेक्ट्रिक मोबिलिटी उत्पाद उपलब्ध कराने पर केंद्रित है जो हर भारतीय के लिए सस्ती और सुलभ हैं।

समेकित आधार पर, REL ने Q2 FY23 में 103.डायरेक्ट ब्रोकर 50 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया, जबकि Q2 FY22 में 4.48 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ था। Q2 FY23 डायरेक्ट ब्रोकर में शुद्ध बिक्री बढ़कर 1,175.76 करोड़ रुपये हो गई, जबकि Q2 FY22 में 0.54 करोड़ रुपये दर्ज की गई थी।

शेयर ब्रोकर चुनने में इन पांच बातों का रखें ध्यान

शेयर बाजार में शेयर खरीदन-बेचना बच्चों का खेल नहीं. इसके लिए आपको जरूरत होती है. ब्रोकर के चयन के दौरान इन बातों का रखें ध्यान.डायरेक्ट ब्रोकर

शेयर ब्रोकर चुनने में इन पांच बातों का रखें ध्यान

1. डिस्काउंट ब्रोकर पर दांव!
डिस्काउंट ब्रोकर आपके आदेशानुसार सिर्फ शेयरों की खरीद फरोख्त करते हैं. फुल सर्विस ब्रोकर आपको निवेश आइडिया भी डायरेक्ट ब्रोकर देते हैं. इसलिए यदि आप बाजार की उथल-पुथल और हलचल को समझते हैं, जो आप डिस्काउंट ब्रोकर का चुनाव कर सकते हैं. अन्यथा फुल सर्विस ब्रोकर ही बेहतर है.

2. फोन या ऑनलाइन कारोबार की सेवा
आप कारोबार के लिए फोन और इंटरनेट दोनों का ही इस्तेमाल कर सकते हैं. ब्रोकर का चयन करने से पहले यह जान लेना जरूरी है कि वह दोनों में से कौनसी सुविधा मुहैया करवाता है. हालांकि, हाइब्रिड ब्रोकर्स दोनों ही सुविधाएं देते हैं.

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3. ब्रोकिंग चार्जेज पर नजर
अकसर ब्रोकर्स अपना ब्रोकिंग चार्ज फिक्स्ड ही रखते हैं. हालांकि, ये कारोबार के वॉल्यूम और फ्रीक्वेंसी पर भी निर्भर करते हैं. ऐसे में इस बारे में बात कर लेना भी जरूरी है.

4. अन्य सुविधाएं के बारे में जानें
कुछ ब्रोकरेज हाउस सिर्फ इक्विटी ब्रोकिंग की सेवा ही नहीं प्रदान करतें, बल्कि कई प्रकार की अन्य सेवाएं भी आप तक पहुंचाते हैं. ऐसे में जान लें कि यह सेवाएं क्या हैं और आपके लिए इनकी क्या उपयोगिता है. इसके बाद ही ब्रोकर का चयन करें.

5. ब्रोकरेज की छवि जान लें
अपने ब्रोकर पर मुहर लगाने से पहले बाजार में उसकी छवि जान लें. ब्रोकर की सेवाओं और सुविधाओं की संतुष्टि के बाद ही उससे जुड़े. सभी ब्रोकरेज के खिलाफ दर्ज शिकायतों का ब्यौरा सेबी के पास मिल जाएगा.

(नोट: यह लेख सेंटर फॉर इंवेस्टमेंट एजुकेशन एंड लर्निंग के विचारों से प्रभावित हैं. इस लेख में गिरिजा गाद्रे, आरती भार्गव और लब्धि मेहता ने अहम योगदान दिया है.)

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फोनपे को एक और सफलता: कंपनी को IRDAI से डायरेक्ट इंश्योरेंस ब्रोकर का लाइसेंस मिला, सभी कंपनियों के इंश्योरेंस प्रोडक्ट डिस्ट्रीब्यूट करेगी

डिजिटल पेमेंट कंपनी फोनपे को डायरेक्ट इंश्योरेंस ब्रोकर का लाइसेंस मिल गया है। यह लाइसेंस इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉर्टी ऑफ इंडिया (IRDAI) से मिला है। अब डायरेक्ट ब्रोकिंग लाइसेंस के साथ फोनपे भारत में सभी इंश्योरेस कंपनियों के इंश्योरेंस प्रोडक्ट को डिस्ट्रीब्यूट कर सकेगी।

नया ब्रोकिंग लाइसेंस मिलने के बाद फोनपे अब अपने यूजर्स को पर्सनलाइज्ड प्रोडक्ट्स की पेशकश भी कर डायरेक्ट ब्रोकर सकती है। साथ ही भारतीय उपभोक्‍ताओं के लिए इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स के ज्यादा डायवर्स पोर्टफोलियो की भी पेशकश कर सकती है।

2020 में की थी इंश्योरेस के क्षेत्र में एंट्री
फोनपे ने पिछले साल 2020 में एक कॉर्पोरेट एजेंट के रूप में इंश्योरेंस सेगमेंट में एंट्री की। कंपनी ने हर कैटेगरी में सिर्फ 3 इंश्योरेंस कंपनियों के साथ पार्टनरशिप करने तक सीमित रखा। तब से कंपनी ने जनरल इंश्योरेंस, टर्म इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस में ऑफर लॉन्च किए।

ग्रोथ में तेजी आएगी
फोनपे के वाइस प्रेसिडेंट और इंश्योरेंस के हेड गुंजन घई ने बताया कि लाइसेंस इश्योरेंस जर्नी में एक बड़ा मील का पत्थर है। ब्रोकिंग के इस कदम से हमें और गति मिलेगी और इस क्षेत्र में हमारी ग्रोथ में तेजी आएगी।

फोनपे के 30 करोड़ से ज्यादा यूजर्स
फोनपे भारत का लीडिंग डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म है, जिसके 30 करोड़ से ज्यादा यूजर्स हैं। फोनपे के जरिए यूजर्स पैसे ट्रांसफर कर सकते हैं। इसके अलावा मोबाइल, डीटीएच, डेटा कार्ड रिचार्ज कर सकते हैं। स्टोर पर पेमेंट कर सकते हैं। फोनपे के जरिए सोना भी खरीद सकते हैं और निवेश कर सकते हैं।

फोनपे ऐप भारत का लीडिंग UPI डायरेक्ट ब्रोकर ऐप बनकर उभरा
फोनपे ऐप भारत का लीडिंग यूनीफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) डायरेक्ट ब्रोकर ऐप बनकर उभरा है। जुलाई 2021 में कुल 1.4 बिलियन ट्रांजैक्शन किए गए, जिसका कुल मार्केट शेयर करीब 46% रहा है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के जारी आंकड़ों के मुताबिक फोनपे ऐप से जुलाई 2021 में कुल 2,88,572 करोड़ रुपए का लेनदेन किया गया है।

प्रत्यक्ष योजना/नियमित योजना क्या है?

प्रत्यक्ष योजना/नियमित योजना क्या है?

सब म्यूच्यूअल फंड स्कीमें योजनाओं में दो विकल्प प्रदान करती हैं- प्रत्यक्ष और नियमित| प्रत्यक्ष योजना में, निवेशक AMC के साथ सीधे निवेश करता है जिसमें लेन-देन की प्रक्रिया में कोई वितरक शामिल नहीं होता| नियमित डायरेक्ट ब्रोकर योजना में, निवेशक किसी मध्यस्थ जैसे वितरक, ब्रोकर या बैंकर की मदद से निवेश करता है और इन्हें AMC वितरण शुल्क देती है, डायरेक्ट ब्रोकर जो योजना पर आवेशित कर दिया जाता है|

अतः, प्रत्यक्ष योजना का व्यय अनुपात कम रहता है क्योंकि कोई वितरण शुल्क इसमें निहित नहीं है जबकि नियमित योजना का व्यय अनुपात थोडा अधिक होता है क्योंकि इसमें वितरक को दिया जाने वाला कमीशन भी शामिल रहता ह

म्यूच्यूअल फंड स्कीमों के प्रबंधन में लागत और व्यय एक अपरिहार्य हिस्सा है, फंड प्रबंधन खर्च, बिक्री और वितरण खर्च, अभिरक्षक और रजिस्ट्रार शुल्क/ फी आदि| ये समस्त व्यय, फंड के व्यय अनुपात द्वारा उठाये जाते हैं| ये समस्त व्यय, नियामक SEBI द्वारा निर्धारित सीमा डायरेक्ट ब्रोकर के भीतर रहते हैं|

अतः,अगर निवेशक प्रत्यक्ष योजना के अंतर्गत सीधे निवेश करता है, उसे व्यय में कटौती के चलते मामूली ऊंचे प्रतिफल मिल सकते हैं लेकिन उसके पास वितरण या उनसे सम्बंधित सेवाओं की सुविधायें भी नहीं रहती जो किसी मध्यस्थ के रहते उसे मिलती हैं|

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