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टार्गेट मैच्योरिटी फंड्स क्या हैं

टार्गेट मैच्योरिटी फंड्स क्या हैं

Sensex 1,200 अंकों तक टूटा, क्या म्यूचुअल फंड इनवेस्टर्स को करनी चाहिए फेड की चिंता?

mutual fund investors : यदि आप अपने रिस्क प्रोफाइल के आधार पर अच्छी म्यूचुअल फंड स्कीम्स में निवेश कर टार्गेट मैच्योरिटी फंड्स क्या हैं रहे हैं तो अपना निवेश जारी रखिए

mutual fund investors : यूएस फेड (US Fed) के कल मार्च से ब्याज दरों में बढ़ोतरी करने के बयान के बाद भारतीय स्टॉक मार्केट में घबराहट का माहौल है। अमेरिका का सेंट्रल बैंक महंगाई को लेकर ज्यादा चिंतित है और ऐसा लगता है कि मजबूत ग्रोथ और इम्प्लॉयमेंट डाटा से उन्हें ब्याज दरों में बढ़ोतरी के लिए पर्याप्त गुंजाइश मिलेगी। ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि क्या भारतीय म्यूचुअल फंड इनवेस्टर्स (mutual fund investors) को फेड के कदम को लेकर चिंतित होना चाहिए?

कंपनियों को फंड के लिए करना होगा ज्यादा भुगतान

जैसे कि आप देख सकते हैं, भारतीय बाजार की भी भविष्य में रेट हाइक और इकोनॉमी में इंटरेस्ट रेट के फ्यूचर को लेकर यूएस फेड से मिलने वाले संकेतों पर नजर रखते हैं। अब यह लगभग तय हो गया है कि इजी मनी की टार्गेट मैच्योरिटी फंड्स क्या हैं पॉलिसी (easy money policy) अब जल्द ही बीते दिनों की बात बन जाएग। इसका मतलब है कि लिक्विडिटी घट जाएगी। इसका यह भी मतलब है कि कंपनियों को फंड्स के लिए ज्यादा भुगतान करना होगा।

इक्विटी म्यूच्युअल फंड्स से पैसा कब निकालें, विद्ड्रॉल का राइट टाइम क्या है?

10 साल के लिए 12 फीसदी रिटर्न का सोचा था मगर आपको 15 फीसदी रिटर्न मिल गया और आपका गोल हासिल हो गया.

  • Money9 Hindi
  • Publish Date - July 18, 2021 / 11:11 AM IST

इक्विटी म्यूच्युअल फंड्स से पैसा कब निकालें, विद्ड्रॉल का राइट टाइम क्या है?

इंफ्रास्ट्रक्चर फंड मुख्य रूप से पावर, कंस्ट्रक्शन, कैपिटल गुड्स और मेटल सेगमेंट की कंपनियों के शेयरों में निवेश करते हैं.

इक्विटी म्यूचुअल फंड्स (M utual Fund ) लॉन्ग टर्म के लिए अच्छे हैं, इनमें पैसे लगाने चाहिए- इस तरह की बातें तो हर कोई करता है. लेकिन, इस फंड से कब निकलना चाहिए, निकलने की राइट स्ट्रैटेजी क्या होनी चाहिए ये कोई नहीं बताता. तो आज हम आपकी इसी मुश्किल को आसान करने की कोशिश कर रहे हैं.

एक तय गोल के साथ निवेश करें

जब भी इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश करना हो तो स्पेसिफिक टार्गेट के साथ निवेश करें और जब भी वो टार्गेट पूरा हो जाय विद्ड्रॉ कर लें. मान लीजिए कि आपको अपनी बेटी की शादी के लिए पैसे की जरूरत है और आपने एसआइपी या एकमुश्त अमाउंट से इक्विटी फंड में निवेश करना चालू किया. बेटी की उम्र है 15 साल. आपको 10 साल में 25 लाख इकठ्ठे करने हैं तो सबसे पहले आपके दिमाग में टारगेट होना चाहिए कि आपको कितना अमाउंट इकठ्ठा करना है. अगर ये लक्ष्य सातवें या आठवें साल में अचीव हो जाता है. यानी कि आपने 10 साल के लिए 12 फीसदी रिटर्न का सोचा था मगर आपको 15 फीसदी रिटर्न मिल गया और आपका गोल हासिल हो गया. तो इस रकम को विद्ड्रॉ करके लिक्विड फंड में सेव करना चाहिए.

गोल हासिल न हुआ तो क्या करें

जैसे की हमने ऊपर बताया, अगर आपका 10 टार्गेट मैच्योरिटी फंड्स क्या हैं साल में 25 लाख इकठ्ठा करने का गोल हासिल न हुआ, यानी की 25वें साल तक 25 लाख रुपये इकठ्ठा नहीं कर पाए तो क्या होगा?

अगर आपका 10 साल का टार्गेट है तो आपको 8वें और 9वें साल से थोड़ा-थोड़ा पैसा सेव करना है क्योंकि ऐसा न हो की जिस दिन तक पैसे की जरूरत हो उस दिन तक राह देखी और उसी टाइम पे मार्केट में कोई बड़ा करेक्शन आ गया और आपके पैसे की ग्रोथ घट गई तो आखिरी मिनट तक राह देखने की बजाए थोड़ा-थोड़ा पैसा निकालते रहना चाहिए.

हर कोई मार्केट के पीछे भागे तब हो जाओ सावधान

मार्केट में जब तेजी का माहौल होता है तब लोग उसके पीछे भागते हैं. हर कोइ व्यक्ति जो मार्केट के बारे में ज्यादा जानता भी नहीं वो भी रातों-रात शेयर बाजार से पैसा कमा लेना चाहता है. दरअसल, 10 साल में इस तरह का माहौल दो या तीन बार अवश्य आता है. ऐसे वक्त में आपको सावधान हो जाना चाहिए. मार्केट का माहौल देख के आपको एग्जिट करना चाहिए.

एंकरएज ट्रेनिंग के फाउंडर एंड सीईओ जिगर पारेख कहते है, “फंड से निकलने के लिए आप पीइ, पीबी और मार्केट केप टु जीडीपी के रेशियो को भी देख सकते है. ये रेशियो अपनी एवरेज के मुकाबले बहोत हाइ है यानी ओल टार्गेट मैच्योरिटी फंड्स क्या हैं टार्गेट मैच्योरिटी फंड्स क्या हैं टाइम हाइ की तरफ चल रहा है तो उस टाइम में भी आप इक्विटी म्यूच्युअल फंड से पैसा निकाल सकते हो. और लिक्विड फंड में स्विच करके प्रोफिट बुक कर सकते हो. याद रहे आपको अपने गोल एचिव के लिए निवेश करना है तो एक्जिट स्ट्रेटेजी के बारे में भी मालूम होना टार्गेट मैच्योरिटी फंड्स क्या हैं चाहिए.”

इमरजेंसी के लिए बेस्ट है ये फंड, परेशानी में तुरंत मिल जाता है कैश

जीवन में किसी अप्रत्याशित घटना की कल्पना करना मुश्किल होता है। यह किसी भी तरह की हो सकती है। अचानक नौकरी जा सकती है या गंभीर बीमारी की चपेट में आ सकते हैं। इस तरह की स्थिति का सामना करने के लिए.

इमरजेंसी के लिए बेस्ट है ये फंड, परेशानी में तुरंत मिल जाता है कैश

जीवन में किसी अप्रत्याशित घटना की कल्पना करना मुश्किल होता है। यह किसी भी तरह की हो सकती है। अचानक नौकरी जा सकती है या गंभीर बीमारी की चपेट में आ सकते हैं। इस तरह की स्थिति का सामना करने के लिए आपातकालीन कोष जरूरी है। वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, आपातकालीन कोष के लिए एफडी से बेहतर विकल्प लिक्विड म्यूचुअल फंड है।

टारगेट को पूरा करने में करता है मदद
आपातकालीन कोष बनाने की प्रमुख वजह यह है कि किसी भी स्थिति में निवेश को छेड़ना नहीं पड़े। यानी अगर आपने कोई दूसरा निवेश घर या कार खरीदने के लिए कर रखा है तो उसको तोड़ने की जरूरत नहीं होगी। इस तरह आप अपने वित्तीय लक्ष्य को आसानी से पा लेंगे। वहीं आपातकालीन कोष नहीं होने पर आपको निवेश तोड़ने होंगे।

सावधि जमा के फायदे और नुकसान
आपातकालीन कोष का पैसा अगर आप सावधि जमा (एफडी) में रखना चाहते हैं तो आपको कम से कम सात दिन और अधिक से अधिक 10 साल तक निवेश का विकल्प मिलता है। मौजूदा समय में बैंकों की एफडी पर 5.5% से 7.75% का ब्याज मिल रहा है। इसलिए यह लंबी अवधि के लिए एक टार्गेट मैच्योरिटी फंड्स क्या हैं अच्छा विकल्प है। हालांकि, अगर आपको मैच्योरिटी से पहले पैसे की जरूरत आ जाती है और एफडी को तोड़ देते हैं तो बैंक लगभग 0.5% से 1% की पेनल्टी लेते हैं। यानी अगर आपको टार्गेट मैच्योरिटी फंड्स क्या हैं अचानक पैसे की जरूरत आ गई तो आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है।

निवेश पर ज्यादा रिटर्न
लिक्विड म्यूचुअल फंड्स में आपको एफडी की तुलना में अधिक रिटर्न मिल सकता है। लिक्विड फंड्स का रिटर्न आमतौर पर 7% से 8% प्रति वर्ष के आसपास होता है। ऑनलाइन का इस्तेमाल करके, लिक्विड फंड में आसानी से निवेश किया जा सकता है। इसमें निवेश करने का दूसरा फायदा है कि कोई लॉक इन पीरियड नहीं होता है। यानी आपको पैसे की जब जरूरत पड़ी आप आसानी से निकाल सकते हैं।

जोखिम का आकलन
सुरक्षा की दृष्टि से, एफडी और लिक्विड फंड्स दोनों सुरक्षित हैं, लेकिन सुनिश्चित रिटर्न के मामले में एफडी ज्यादा बेहतर है। लिक्विड फंड के मामले में बेहतर टैक्स कुशलता और तरलता मिलती है। यानी जब जरूरत हुई आप पैसे को आसानी से अपने खाते में ट्रांसफर कर सकते हैं। हालांकि, लिक्विड फंड बाजार से जुड़ा हुआ होता है तो मिलने वाला रिटर्न बाजार की चाल के अनुसार प्रभावित होता है।

यह भी जानें
एफडी में मिलने वाले ब्याज पर, टीडीएस लग सकता है। वहीं लिक्विड फंड्स में ऐसा नहीं होता है। एफडी से होने वाले आय पर निवेशक के कर स्लैब के हिसाब से टैक्स लिया जाता है। लिक्विड फंड पर तीन साल से कम समय के लिए निवेश करने पर, निवेशक के कर स्लैब के हिसाब से टैक्स लिया जाता है। अगर निवेश तीन साल से अधिक है तो इंडेक्सेशन के साथ 20% की दर से टैक्स लिया जाता है।

- 5.5% से 7.5% सालना ब्याज मिल रहा है एफडी पर

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500 रुपए से निवेश का मौका: बिरला म्यूचुअल फंड ने लॉन्च किया निफ्टी SDL प्लस PSU इंडेक्स फंड, अच्छी कंपनियों में यह फंड करेगा निवेश

आदित्य बिरला सनलाइफ म्यूचुअल फंड ने निफ्टी SDL प्लस PSU बॉन्ड इंडेक्स फंड लॉन्च किया है। यह फंड सितंबर 2026 में मैच्योर होगा। इस फंड में रकम में से 60% रकम SDL में निवेश होगी जबकि 40% PSU बॉन्ड में निवेश होगी। इसमें कम से कम 500 रुपए का निवेश किया जा सकता है।

23 सितंबर को बंद होगा फंड

यह नया फंड 15 सितंबर को खुला है और 23 सितंबर को बंद होगा। यह एक ओपन एंडेड स्कीम है जो निफ्टी टार्गेट मैच्योरिटी फंड्स क्या हैं SDL प्लस PSU बॉन्ड सितंबर 2026 इंडेक्स को ट्रैक करेगी। यह फंड मैच्योरिटी डेट के साथ टार्गेट मैच्योरिटी को परिभाषित करेगा। यह पूरी तरह से विविधीकृत पोर्टफोलियो वाली स्कीम है। चूंकि यह इंडेक्स फंड है, इसलिए इसमें निफ्टी SDL प्लस PSU बॉन्ड का प्रदर्शन दिखेगा।

60% हिस्सा SDL में निवेश होगा

इस पोर्टफोलियो का टार्गेट मैच्योरिटी फंड्स क्या हैं 60% हिस्सा स्टेट डेवलपमेंट लोन (SDL) के टॉप 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में निवेश किया जाएगा। बाकी 40% पैसा टॉप रेटिंग यानी AAA रेटिंग वाले 10 PSU बॉन्ड में निवेश किया जाएगा। यह निवेश क्रेडिट क्वालिटी और लिक्विडिटी स्कोर के आधार पर किया जाएगा।

ब्याज दरें कम होने का फायदा

जानकारों का कहना है कि इस समय ब्याज दरें कम हैं ऐसे में इस तरह के ओपन एंडेड डेट इंडेक्स फंड निवेशकों को टार्गेट मैच्योरिटी के साथ स्थिर रिटर्न का भी अवसर देते हैं। इसलिए असेट अलोकेशन के रूप में इस तरह के फंड को देखा जा सकता है। इसमें निवेश को मैच्योरिटी तारीख तक रोक कर एक स्थिर रिटर्न देने का उद्देश्य है। इस तरह से इसका तिमाही आधार पर रीबैलेंस और रिव्यू किया जाएगा।

आदित्य बिरला सनलाइफ म्यूचुअल फंड के MD एवं CEO ए. बालासुब्रमणियन ने कहा कि रिटर्न के अनुमानों के साथ पैसिव डेट प्रोडक्ट परंपरागत सेविंग संसाधनों का एक मिला-जुला रूप होता है। इसमें अच्छी लिक्विडिटी होती है और टैक्स का फायदा मिलता है।

ब्याज दरें आकर्षक हैं

उन्होंने कहा कि ब्याज दरें ज्यादा आकर्षक हैं और महंगाई के आंकड़ों में भी कमी आ रही है। इससे निवेशकों को मिलने वाला रियल रिटर्न बढ़ रहा है। निवेशक को ऐसे माहौल में डेट फंड की सुरक्षा और लिक्विडटी के साथ कम दरों का फायदा मिल रहा है। कम और मध्यम अवधि के निवेश के नजरिए से 5 साल का समय एक आकर्षक समय है। सरकारी प्रतिभूतियों (सिक्योरिटीज) की तुलना में SDL काफी आकर्षक है। SDL और AAA टार्गेट मैच्योरिटी फंड्स क्या हैं PSU बॉन्डस उचित रूप से बेहतर रिटर्न दे सकते हैं।

ऑफरिंग को बढ़ाने की योजना

उन्होंने कहा कि बिरला म्यूचुअल फंड इस सेगमेंट में अपनी ऑफरिंग को बढ़ाना चाहता है जो फंड हाउस के वर्तमान एक्टिव फंड की मजबूती के साथ एक अच्छा कांबिनेशन है। हमारा लक्ष्य एक डाइवर्स प्रोडक्ट ऑफरिंग को डेवलप करने का है।

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