Trading के फायदें

क्या मैं इंट्राडे में 1 शेयर खरीद सकता हूं?

क्या मैं इंट्राडे में 1 शेयर खरीद सकता हूं?
मान लो आपके पास ट्रेडिंग के प्रयाप्त धन नही है तो आप इंट्राडे में मार्जिन के साथ ट्रेड कर सकते हो। Sebi के नए रूल के अनुसार आप 5X तक मार्जिन ले सकते हो।

इंट्राडे ट्रेडिंग v/s T-20 मैच

इंट्राडे-ट्रेडिंग यानी आज ही शेयर ख़रीदे और मार्केट बंद होने से पहले आज ही बेच दिए, या उसका उल्टा आज ही बेचे और आज ही खरीद लिए। इंट्राडे-ट्रेडिंग यानी T-20 मैच ! जैसे टी -ट्वेंटी मैच में दोनों टीमें मैच शुरू होने से पहले रणनीति बनाती हैं , पिच का निरीक्षण करती हैं , Toss जीतने पर बैटिंग या बॉलिंग का निर्णय निश्चित करते हैं। ठीक वैसे ही इंट्राडे -ट्रेडिंग में ट्रेड करने के लिए एक दिन पहले ही शेयर का चुनाव किया जाता है , उसका टेक्निकल एनालिसिस किया जाता है , उससे जुडी खबरों को पढ़ा / देखा जाता है। कैंडल -स्टिक पैटर्न , MACD [Moving Average Convergence Divergence] , RSI [Relative Strength Index] टेक्निकल इंडीकेटर्स / टूल्स से उसकी कमजोरी या मजबूती को समझा जाता है।

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RSI - MACD Technical Chart

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3 दिन में 17 फीसदी लुढ़के नायका के शेयर, क्‍यों बाजार को नहीं आ रहा रास

News18 हिंदी लोगो

News18 हिंदी 6 घंटे पहले News18 Hindi

© News18 हिंदी द्वारा प्रदत्त "3 दिन में 17 फीसदी लुढ़के नायका के शेयर, क्‍यों बाजार को नहीं आ रहा रास"

नई दिल्‍ली. नायका की पेरेंट कंपनी एफएसएन ई-कॉमर्स वेंचर्स के शेयरों में गिरावट जारी है. तीन कारोबारी सत्रों में ही यह स्‍टॉक 17 फीसदी लुढ़क चुका है. लंबे समय से दबाव में चल रहे नायका के शेयर आज भी गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं. समाचार लिखे जाने तक स्‍टॉक एनएसई पर 2.58 फीसदी लुढ़ककर 179.65 फीसदी पर कारोबार कर रहा था. शेयर की कीमत में आई इस बड़ी गिरावट के पीछे ब्‍लॉक डील विंडो के जरिए निवेशकों का शेयरों की बिक्री करना है.

Intraday Trading in Hindi (संपूर्ण ज्ञान)

Intraday Trading in Hindi : इंट्राडे ट्रेडिंग क्या है , इंट्राडे ट्रेडिंग कैसे करते है, इंट्राडे में बड़े नुकसान से कैसे बचे,डे ट्रेडिंग में पैसा लगाने से पहले क्या करना चाहिए? intraday trading से जुड़ी सारे जानकारी एक ही आर्टिकल मे।

Intraday Trading Kya hain

आज शेयर मार्केट के नाम से हर कोई ज्ञात है। शेयर मार्केट पर कंपनी के शेयर खरीदे बेची जाती है। इन कंपनी के शेयर को लोग अलग-अलग समय के लिए खरीदते है। जैसे कि कोई व्यक्ति शेयर को खरीदकर 2-3 साल बाद बेचते है। यानी कि वो long term के लिए शेयर को होल्ड करते है। जिसे positional trading या long term इन्वेस्टर कह सकते है। ठीक उसी प्रकार कोई व्यक्ति शेयर को खरीदकर 1-2 हप्ते तक होल्ड कर फिर बेचते है। इसे स्विंग ट्रेडिंग भी कहाँ जा सकता है।

Intraday Trading In Hindi

दरअसल हमारे इंडियन शेयर मार्केट सुबह के 9:15 को ओपन होते है और शाम 3:30 तक चलता है। आपको इसी टाइम के अंदर ही आर्डर लगाना होता है।

इस टाइम के अंदर खरीदे हुए शेयर को आप 3 टाइम फ्रेम तक होल्ड कर पाते हो।

अगर आप किसी शेयर को same day में buy करके, sell करते हो तो उसे intraday ट्रेडिंग कहाँ जाता है।

Intraday trading में आपको किसी भी शेयर को सुबह 9:15 के बाद खरीदना होता है और उसे 3:30 से पहले बेचना पड़ता है। अगर किसी कारण बसत आप शेयर को नही बेच पाते हो तो आप ब्रॉकर खुद ब खुद उसे सेल कर देते है।

आज बहुत सारे लोग इंट्राडे ट्रेडिंग करते है। लेकिन एक बात बता देता हूँ कि इंट्राडे ट्रेडिंग बहुत risky होते है। अगर आप जोखिम लेने में सक्षम हो तो तभी आप intraday trading में आए।

इंट्राडे ट्रेडिंग कैसे करें?

ट्रेडिंग करने के लिए सबसे पहले आपको डेमेंट एकाउंट के जरूरत पढ़ते है। डेमेंट एकाउंट बनाने के लिए सबसे पहले नीचे दिए दस्तावेज के होना अनिवार्य होता है।

Conclusion

तो दोस्तो उम्मीद है, मैं आपको समझा पाए इंट्राडे ट्रेडिंग क्या है और कैसे करते है Intraday in Hindi? अगर आपको इस बारे में कोई भी डाउट रह गए है तो आप कमेंट करते पूछ सकते है।

Intraday trading in hindi यह पोस्ट आपको कैस लगा हमे कमेंट करके जरूर बताएं।

पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा अपने दोस्तों के साथ शेयर करे।

Suraj Debnath

असम के निवासी सूरज देबनाथ इस ब्लॉग के संस्थापक है। इन्होने विज्ञान शाखा में स्नातक किया हुआ है। इन्हें शेयर मार्किट, टेक्नोलॉजी, ब्लोगिंग ,पैसे कमाए जैसे विषयों का काफी अनुभव है और इन विषयों पर आर्टिकल लिखते आये है। Join Him On Instagram- Click Here

डिलीवरी ट्रेडिंग क्या है?

हर एक निवेशक के लिए डिलीवरी ट्रेडिंग क्या है इसकी जानकारी होना बहुत जरूरी है। डिलीवरी ट्रेडिंग निवेशकों के लिए एक ऐसी विधि मानी जाती है जो उनको एक ही दिन में शेयर खरीद कर जब चाहे बेचने का अवसर प्रदान करती है।

शुरुआत में जो निवेशक डिलीवरी में शेयर खरीदता है वह अपने खरीदे गए शेयर डीमैट अकाउंट में ट्रांसफर करवाता है। डिलीवरी ट्रेडिंग में निवेशक अपनी मर्जी के अनुसार खरीदे हुए शेयरों को लंबे समय तक होल्ड करके अपने पास रख सकता है।

इस प्रक्रिया के लिए उसको किसी भी तरह की मनाही नहीं है। यह अक्सर देखा गया है की डिलीवरी ट्रेडिंग उन्हीं निवेशकों के लिए लाभदायक है जो लांग टर्म इन्वेस्टमेंट में विश्वास रखते हैं। डिलीवरी में निवेश करने के लिए निवेशक के पास पर्याप्त मात्रा में धनराशि होनी चाहिए।

डिलीवरी ट्रेडिंग के कुछ महत्वपूर्ण नियम होते है:

  • निवेशक को डिलीवरी में शेयर खरीदने के लिए उस कंपनी का फंडामेंटल एनालिसिस करना बहुत जरूरी होता है।
  • डिलीवरी में खरीदे गए शेयरों को बेचने के लिए सही समय की प्रतीक्षा करें जल्दबाजी में आकर कोई भी निर्णय ना लें जिससे कि आपको हानि हो।
  • निवेशक को डिलीवरी ट्रेडिंग में शेयर अलग-अलग कंपनियों के खरीदने चाहिए जिससे कि उसको आगे जाकर फायदा हो। अच्छी तरह शेयर और अपने फंड को डायवर्सिफाई करने से नुकसान कम होता है।
  • निवेशक के लिए यह जरूरी है कि डिलीवरी ट्रेडिंग करने से पहले उसको उसकी अच्छी तरह से जानकारी ले लेनी चहिये ताकि वह हर एक कदम सोच-समझकर उठाए।
  • डिलीवरी ट्रेडिंग करने के लिए हर एक ट्रेडर के खाते में पर्याप्त मात्रा में धन होना चाहिए ताकि उसको अपने शेयरों को खरीदने और क्या मैं इंट्राडे में 1 शेयर खरीद सकता हूं? क्या मैं इंट्राडे में 1 शेयर खरीद सकता हूं? बेचने के लिए कोई भी दिक्कत ना हो।
  • ट्रेडर को अपने टारगेट प्राइस और स्टॉप लॉस की वैल्यू सेट करके रखनी चाहिए।
  • चाहे आपने शेयर डिलीवरी में लिए हैं लेकिन आपके पास एक स्टॉप लॉस जरूर होना चाहिए और उस स्टॉपलॉस को हिट करते ही आपको जितना नुकसान हो उसी नुकसान में निकल जाना चाहिए। मार्केट के ऊपर जाने का इंतजार नहीं करना चाहिए।
  • निवेशक को अपने डिलीवरी ट्रेडिंग के अकाउंट को चलाने के लिए अपने शेयरों का पूरा मूल्य देना होता है।
  • डिलीवरी का कोई भी मार्जिन नहीं होता है जिस के कारण खरीदे गए शेयरों का मूल्य उसी समय चुकाना पड़ता है।

डिलीवरी में ट्रेडिंग करने की फीस:

  • डिलीवरी में शेयर लेने का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि ज्यादातर स्टॉक ब्रोकर डिलीवरी के लिए ब्रोकरेज फीस नहीं लेते है। जिसका मतलब है कि आपको शेयर खरीदने और बेचने के लिए किसी भी तरह की ब्रोकरेज नहीं देनी पड़ती है।
  • डिलीवरी ट्रेडिंग में सबसे पहला शुल्क जीएसटी का लगता है और जीएसटी का शुल्क ब्रोकर के साथ ट्रांजैक्शन करते वक्त भी देना होता है।
  • डिलीवरी के लिए एसटीटी और सीटीटी का शुल्क भी लगता है।
  • ट्रांजैक्शन चार्जेस भी लगते हैं।
  • 1899 में भारत Stamp Act द्वारा स्टैंप ड्यूटी के नाम का शुल्क भी लगाया गया है।
  • डिलीवरी में आमतौर पर SEBI द्वारा भी शुल्क लगाया जाता है।
  • डिलीवरी ट्रेडिंग में निवेशक को ब्रोकर द्वारा एक मार्जिन भी दिया जाता है। जिसमें कि वह कम ब्याज दर पर शेयर खरीद सकता है। ब्रोकर निवेशक को इस तरह का मार्जिन बताता है जिसमें कि ब्याज दर बहुत ही कम होता है या फिर ना के बराबर क्या मैं इंट्राडे में 1 शेयर खरीद सकता हूं? ही होता है ताकि निवेशक डिलीवरी ट्रेडिंग में लंबे समय तक बना रहे।
  • नए निवेशकों को क्या मैं इंट्राडे में 1 शेयर खरीद सकता हूं? हमेशा मार्जिन ट्रेडिंग से दूर रहना चाहिए क्योंकि इसमें जोखिम होता है। उदाहरण के तौर पर चाहे आपको लाभ हो या हानि हो आपका स्टॉक ब्रोकर आपसे जो भी बनता ब्याज होगा वह जरूर लेगा।

डिलीवरी ट्रेडिंग के नुकसान

  • हर एक निवेशक को डिलीवरी ट्रेडिंग में निवेश करने के लिए एडवांस में पैसा देना होता है और इसके साथ ही अगर आपके पास उचित मात्रा में धन है तो ही आप डिलीवरी में स्टॉक का ट्रेड कर सकते हैं।
  • इसमें निवेशक को धैर्य रखकर लंबे समय का निवेश करना होता है।
  • इसमें स्टॉक मार्केट क्रैश का रिस्क भी बना रहता है।
  • लंबे समय तक निवेश करने से अच्छे रिटर्न आने की गारंटी नहीं होती है।

हम इस बात की आशा करते हैं कि आपको हमारे द्वारा ऊपर दी गई जानकारी में डिलीवरी ट्रेडिंग क्या है और उसमें कैसे निवेश करना चाहिए इसकी जानकारी अच्छे से मिल गई होगी। आपको इतनी जानकारी तो हो गई होगी की डिलीवरी ट्रेडिंग में निवेश करने से पहले आपको इसकी अच्छी तरह से रिसर्च करनी जरूरी है। और यह एक लॉन्ग टर्म प्रोसेस है और इसमें निवेश करने के लिए आपको धैर्य रखना आवश्यक होता है। इसमें आपके पास पर्याप्त मात्रा में धन होना भी जरूरी है तभी आप डिलीवरी ट्रेनिंग में निवेश कर सकेंगे। इन बातों के साथ-साथ यह बात तय है कि डिलीवरी ट्रेडिंग में आपको आगे जाकर बहुत ही मुनाफा और अपने आमदनी में वृद्धि देखने को मिलती है।

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